Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 60
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 21, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
त्यज राम सुषुप्तस्थः स्वात्मनैव भवात्मनः ।
मणिर्हि प्रतिबिम्बानां प्रतिषेधक्रियां प्रति ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कहिये, मैंने संकल्पो के साथ यद्यपि द्वैतभाव का त्याग कर दिया है तथापि जैसे शुद्ध मणि में
प्रतिबिम्बों का निवारण नहीं किया जा सकता, वैसे ही इच्छा न होने पर भी उन द्वैतभावों का मुझ में
वारण नहीं किया जा सकता, तो इस पर कहते हैं।
मणि जड़ है, अतएव वह प्रतिबिम्बो का निषेध नहीं कर सकती हे श्रीरामचन्द्रजी, आप तो चेतन
हैं, इसलिए आपकी जड़ मणि के साथ समानता नहीं हो सकती