Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 22, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
अपारपर्यन्तनभो दिक्कालादिक्रियान्वितम् ।
अहमेवेति सर्वत्र यः पश्यति स पश्यति ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
असीम जो आकाश, दिशा, काल आदि हैं ओर उनमें वर्तमान परिच्छिन्न
उत्पत्ति, गति आदि क्रियाओं से युक्त वस्तु हैं, उन सबमें “भे ही हू ऐसा जो देखता है, वही पूर्वोक्त पूर्ण
आत्मा को देखता है