Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 22, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
वालाग्रलक्षभागात्तु कोटिशः परिकल्पितात् ।
अहं सूक्ष्म इति व्यापी यः पश्यति स पश्यति ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
करोड़ों अंशों मे विभक्त जो बाल के अग्रभाग का लाखवाँ भाग है, मैं उससे
भी सूक्ष्म और व्यापक हूँ, ऐसा जो देखता है, वही पूर्वोक्त पूर्ण आत्मा को देखता है