Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 22, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
आधिव्याधिभयोद्विग्नो जरामरणजन्मवान् ।
देहोऽहमिति यः प्राज्ञो न पश्यति स पश्यति ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
मनोव्यथा, दैहिक व्यथा और भय से उद्विग्न होनेवाला जरा, मरण और जन्म से युक्त देह मैं हूँ” जो
बुद्धिमान इस तरह नहीं देखता है, वही पूर्वोक्त पूर्ण आत्मा को देखता है