Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 22, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
तिर्यगूर्ध्वमधस्ताच्च व्यापको महिमा मम ।
द्वितीयो न ममास्तीति यः पश्यति स पश्यति ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
मेरी महिमा तिरछे,
ऊपर, नीचे सर्वत्र व्याप्त है, मुझसे अन्य कोई नहीं है, इस तरह जो देखता है, वही पूर्वोक्त पूर्ण आत्मा
को देखता है