Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 22, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
नीरागं निरुपासङ्गं निर्द्वन्द्वं निरुपाश्रयम् ।
विनिर्याति मनो मोहाद्विहगः पञ्जरादिव ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
कामना आदि से छुटकारा पाता है, तदनन्तर अज्ञान से छुटकारा पाता हे