Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
किंचिदस्यां प्रनष्टायां ज्ञस्य नष्टमरिन्दम ।
स्थितायां संस्थितं सर्वं तेनेयं ज्ञसुखावहा ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
यह शरीररूपी महानगर ज्ञानी के अनन्तसुख के लिए है, यह जो कहा था, उसीको विशद करते हैं ।
हे शत्रुतापन, उसके नष्ट हो जाने पर ज्ञानी की एक नगण्य तुच्छ वस्तु का नाश हुआ ओर इसके
रहने पर सब भोग-मोक्ष सुख स्थित रहा, इसलिए यह ज्ञानी के लिए सुखावह हे