Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
तस्यां शरीरपुर्यां हि राज्यं कुर्वन्गतज्वरः ।
ज्ञस्तिष्ठति गतव्यग्रः स्वपुर्यामिव वासवः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे इन्द्र अपनी नगरी में निश्चिन्त होकर
राज्य करता हे, वैसे ही उस शरीररूपी नगरी में राज्य करता हुआ ज्ञानी निश्चिन्त और स्वस्थ रहता
है