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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

न क्षिपत्यवटाटोपे मनोमत्ततुरङ्गमम् । न लोभदुर्द्रुमादाय प्रज्ञापुत्रीं प्रयच्छति ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

वह योनिगर्त में ही पराक्रमवाले काम के विषय मेँ मनरूपी मत्त घोडे को प्रेरित नहीं करता । लोभरूपी विषवृक्ष को शुल्करूप से लेकर प्रज्ञारूपी पुत्री को मोह, धर्म आदि दुष्कुल में उत्पन्न हुए लोगों को नहीं देता