Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
अज्ञानपरराष्ट्रं च न रन्ध्रं त्वस्य पश्यति ।
संसारारिभयस्यान्तर्मूलान्येव निकृन्तति ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
अज्ञानरूपी परराष्टू उसके छिद्र को नहीं देखता और वह संसाररूपी शत्रु के भय
के मूल स्नेहो को उखाड़ फेकता हे