Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
तृष्णासारपरावर्ते कामसंभोगदुर्ग्रहे ।
न निमज्जति पर्यस्तः सुखदुःखप्रदेवने ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
काम-भोगरूपी दुष्टग्राह से युक्त सुखलेश रूपी दुःखों से
रुलानेवाले इस तृष्णा नदी के प्रवाह के बड़े भारी आवर्त में बहिर्मुख होकर वह निमग्न नहीं होता