Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । नगरीत्वं शरीरस्य कथं नाम महामुने । एतां चाधिवसन्योगी कथं राजसुखैकभाक् ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे भगवन्‌, यह शरीर नगरी कैसे है ओर इसमें रहनेवाला योगी एकमात्र सुख का ही भागी कैसे होता हे ?