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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । रम्येयं देहनगरी राम सर्वगुणान्विता । ज्ञस्यानन्तविलासाढ्या स्वालोकार्कप्रकाशिता ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, ज्ञानी की देहनगरी बड़ी मनोहर हे । सब गुणों से युक्त है, अनन्त विलासो से भरपूर है, आत्मज्योतिरूपी सूर्य से वह प्रकाशित है