Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
स्थितया संस्थितं सर्वं किंचिन्नष्टं न नष्टया ।
यया पुर्या महीयस्या सा कथं न सुखावहा ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
जिस बडी
भारी देहरूपी नगरी के रहने से सब यानी भोगमोक्ष स्थित रहता है और नष्ट होने से कुछ नष्ट नहीं
होता, वह सुख आदि की साधन क्यों न होगी ?