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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 33

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 33

संस्कृत श्लोक

अत्रस्थः पुरुषो भोगानात्मा सर्वगतोऽपि सन् । विश्वकल्पकृतान्भुक्त्वा पुंसामधिगतार्थभाक् ॥ ३३ ॥

हिन्दी अर्थ

सर्वव्यापक होकर भी इस शरीररूपी महानगरी में स्थित हुआ आत्मारूपी पुरुष विश्व के द्वारा रचे गये विविध प्रारब्ध भोगों का भोग करके पहले से ज्ञात आत्मरूप परम पुरुषार्थ को प्राप्त होता है