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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 34

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 34

संस्कृत श्लोक

कुर्वन्नपि न कुर्वाणः समस्तार्थक्रियोन्मुखः । कदाचित्प्रकृतान्सर्वान्कार्यार्थाननुतिष्ठति ॥ ३४ ॥

हिन्दी अर्थ

व्यवहार दृष्टि से कर्म करता हुआ भी परमार्थ दृष्टि से कुछ न करता हुआ समस्त पदार्थो की क्रिया में उन्मुख ज्ञानी कभी व्यवहार प्राप्त सम्पूर्ण कार्यो को करता हे