Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
कदाचिल्लीलया लोलं विमानमधिरोहति ।
अनाहतगतिः कान्तं विहर्तुममलं मनः ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
उसकी देहनगरी में कान्तादिभोगरूप फल कहते हैं।
अव्याहतगति यह आत्मा कभी भोगकौतुकवाले निर्मल अपने मन का विनोद करने के लिए चंचल
विमान के तुल्य हृदयकमल में आरूढ होता है