Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
तत्रस्थो लोकसुन्दर्या सततं शीतलाङ्गया ।
रमते रामया मैत्र्या नित्यं हृदयसंस्थितः ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त शरीररूपी महानगरी में स्थित हुआ वह
हृदयकमल में आरूढ़ होकर सदा शीतल शरीरवाली लोकमनोहर मैत्रीरूपी प्रिया के साथ नित्य क्रीडा
करता है