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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 41

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 41

संस्कृत श्लोक

परिज्ञातोपभुक्तो हि भोगो भवति तुष्टये । विज्ञाय सेवितो मैत्रीमेति चोरो न शत्रुताम् ॥ ४१ ॥

हिन्दी अर्थ

यह नश्वर है, क्षणिक है, यों पहले ज्ञात होकर उपभुक्त हुआ भोग तृप्तिदायक होता है, शत्रुता को प्राप्त नहीं होता