Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
नरनारीनटौघानां विरहे दूरगामिनाम् ।
ज्ञेन यात्रेव सुभगा भोगश्रीरवलोक्यते ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
समाज का विघटन होने पर दूर जानेवाले समाज के नरनारीरूपी नटों के समूह की यात्रा
के समान इस सुन्दर भोग्य पुत्र, धन आदि की शोभा को ज्ञानी देखता है