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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 46

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 46

संस्कृत श्लोक

अप्राप्तचिन्ताः संप्राप्तसमुपेक्षाश्च सन्मतिम् । न कम्पयन्ति तरलाः पिच्छाघाता इवाचलम् ॥ ४६ ॥

हिन्दी अर्थ

क्यों ऐसा करता है ? इस पर कहते हैं। जैसे पर्वत को चंचल मोरपंख के आघात नहीं कँपाते हैं, वैसे ही ज्ञानीपुरुष को अप्राप्तप्राप्ति की चिन्ता और प्राप्त पदार्थो की उपेक्षा विचलित नहीं करती