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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 47

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 47

संस्कृत श्लोक

संशान्तसर्वसंदेहो गलिताखिलकौतुकः । संक्षीणकल्पनादेहो ज्ञः सम्राडिव राजते ॥ ४७ ॥

हिन्दी अर्थ

सम्पूर्ण सन्देहों के कारण अज्ञान के नष्ट होने से ही जिसके सम्पूर्णं सन्देह शान्त हो गये हैं, सब भोगो मे मिथ्यादृष्टि होने के कारण भोग भोगने का सारा कौतुक जिससे चला गया है, इस दोनों की कल्पना के हेतु स्थूल और सूक्ष्म शरीर जिसके क्षीण हो गये हैं, ऐसा ज्ञानी पुरुष सम्राट की (राजसूययज्ञ के फल स्वराज्य को प्राप्त हुए की) नाई विराजमान होता है