Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
भोगेच्छाकृपणाञ्जन्तून्दीनान्दीनेन्द्रियाणि च ।
अनुन्मत्तमनाः शान्तो हसत्युन्मत्तकानिव ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे शान्तपुरुष मत्तो
का उपहास करता है, वैसे ही प्रशान्तचित्त ज्ञानी पुरुष भोगों की इच्छा से दीन-हीन जन्तुओं की हँसी
करता है ओर दयनीय इन्द्रियों की भी हँसी करता है