Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 50
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
इच्छतोऽन्योज्झितां जायां यथैवान्येन हस्यते ।
इन्द्रियस्येच्छतो भोगं तद्वज्ज्ञेन विहस्यते ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे अन्य के द्वारा परित्यक्त सत्री की इच्छा
कर रहे पुरुष की प्रवृत्ति का अन्य पुरुष उपहास करता है, ऐसे ही भोगों की इच्छा कर रही इन्द्रियो की
प्रवृत्ति का तत्त्वज्ञ पुरुष उपहास करता हे