Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 56
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 56 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
मनसोऽभिगृहीतस्य या पश्चाद्भोगमण्डना ।
तामेवालब्धविस्तारां क्लिष्टत्वाद्बहु मन्यते ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
खूब निगृहीत हुए मन की पीछे भिक्षा जलादि विषयों के अर्पण से थोडी बहुत जो लालना है, उसी थोडी
बहुत लालना को, क्लेश में होने के कारण, बहुत मानता है