Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 57
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 57 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 57
संस्कृत श्लोक
बन्धमुक्तो महीपालो ग्रासमात्रेण तुष्यति ।
परैरबद्धो नाक्रान्तो न राज्यं बहु मन्यते ॥ ५७ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त अर्थ में दृष्टान्त कहते हैं।
बन्धन से युक्त हुआ राजा एक कौर भोजन से भी सन्तुष्ट हो जाता है, किन्तु जो शत्रुओं द्वारा
गृहीत नहीं है ओर आक्रान्त नहीं है, वह विशालराज्य को भी अपर्याप्त मानता हे