Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
उरूरुतनुभागाग्रनिर्मितोपस्थनिम्नगा ।
कचत्केशावलीकाचदलप्रस्थवनावृता ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
इसमें बड़ी-बड़ी जंघाओं और शरीर के मध्यभाग की सन्धि के
अग्रभाग में उपस्थेन्द्रिय ही नगर मध्य की नदी बनाई गई है । चमक रहे केशावलीरूपी कोच के तुल्य
नीले पत्तों से युक्त क्रीडा शैल के सदृश सिर, मूँछ, दाढ़ी और काँख के रोमां से यह व्याप्त है