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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 24, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 24, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । महानरकसाम्राज्ये मत्तदुष्कृतवारणाः । आशाशरशलाकाढ्या दुर्जया हीन्द्रियारयः ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

इन्द्रियों की विजय मे उपाय और प्रयत्न की अधिकता बतलाने के लिए उनकी दुर्जयता कहते है । श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामचन्द्रजी, इन्द्रियरूपी शत्रु बड़े दुर्दान्त है, वे तपन, अवीचि, महारौरव, रोरव, संघात, कालसूत्र नामवाले महानरकरूपी साम्राज्य पर एक-एक करके अभिषिक्त हैं, मतवाले पापरूपी हाथियों से युक्त हैं तथा तृष्णारूपी बाण की शलाकाओं से भरपूर है

सर्ग सन्दर्भ

तेईसर्वौँ सर्ग समाप्त चौबीसवाँ सर्म इन्द्रियों की प्रलता, उन पर विजय पाने के उपाय तथा उनसे प्रसाद और बोध द्वारा वासनाक्षय का वर्णन ।