Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 24, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 24, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
एकतत्त्वदृढाभ्यासाद्यावन्न विजितं मनः ।
भृत्योऽभिमतकर्तृत्वान्मन्त्री सत्कार्यकारणात् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
स्वदेहरूपी नगरी के साम्राज्य मे चाकर, मन्त्री, सामन्तआदि के कार्य का शुद्ध मन ही सम्पादन
करता है, ऐसा कहते है ।
विवेकी पुरुष का मन ही अभिमत कार्य करने से चाकर है, उत्तम कार्य का सम्पादन करने से मन्त्री
है ओर इन्द्रियों पर आक्रमण करने से सेनापति है, ऐसा मैं समझता हू