Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 24, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 24, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
पद्मिन्य इव हेमन्ते क्षीयन्ते भोगवासनाः ।
तावन्निशीथवेताला वल्गन्ति हृदि वासनाः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
अज्ञानान्धकार के वेतालरूपी ये वासनाएँ तभी
तक पराक्रम दिखलाती हैं, जब तक परमात्मतत्त्व के दृढ़ाभ्यास द्वारा यह मन विजित नहीं हुआ