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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 24, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 24, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

वसन्त इव मञ्जर्यो वर्धन्ते शुद्धबुद्धयः । प्रक्षीणचित्तदर्पस्य निगृहीतेन्द्रियद्विषः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

जिसके चित्त का अभिमान क्षीण हो गया है, जिसने इन्द्रियरूपी शत्रुओं को निगृहीत कर लिया है, उस पुरुष की भोगवासनाएँ हेमन्त ऋतु मे कमलिनी की भाँति नष्ट हो जाती हैं