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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 24, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 24, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

यथा स्वाधीनमनसः स्वशरीरपुरीश्वराः । आक्रान्तेन्द्रियभृत्यस्य सुगृहीतमनोरिपोः ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

इन्द्रिय आदि के निग्रह काफल कहते हैं। जिसने इन्द्रियरूपी चाकरों को आक्रान्त कर लिया है तथा मन रूपी शत्रु का निग्रह कर लिया है, उस पुरुष की विशुद्ध बुद्धि ऐसे बढ़ती है, जैसे वसन्त ऋतु में फूलों के गुच्छे बढ़ते हैं