Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 24, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 24, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
सुहृदुत्तमविश्वासान्मनो मन्ये मनीषिणाम् ।
स्वालोकितः शास्त्रदृशा बुद्ध्यान्तः स्वानुभावितः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
मन के पिता होने में दूसरा हेतु भी कहते है।
शास्त्र द्वारा दिखाई गई देवता की भावना से इनका शासन अनुल्लंघनीय है" यों देखा गया और
स्नेह बुद्धि से अपने हृदय में अनुभूत पिता जैसे स्वरूपभूत अपनी देह का त्याग कर स्वोपार्जित धनरूप
सिद्धि देता हे, वैसे ही शास्त्र के ज्ञान से चिन्मात्र दृष्टि से देखा गया विवेकबुद्धि से अपने हृदय में अनुभव
किया गया मन अपने स्वरूप का त्यागकर तत्त्वज्ञानरूप सिद्धि देता हे