Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 24, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 24, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
सुगुणे योजितो भाति हृदि हृद्यो मनोमणिः ।
जन्मवृक्षकुठाराणि तथोदर्कोदयानि च ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
मणि के साथ मन के रूपक प्रस्ताव के प्रस्तुत रहते ही मध्य मे श्रीरामचन््रजी की “मन्त्री
सत्कार्यकारणात्' ऐसा पहले जो कहा था उसमें वह सत्कार्य कौन है ? ऐसी विशेष जिज्ञासा को ताडकर
श्रीवलिष्ठजी कहते है ।
मनरूप मन्त्री शास्त्रविहित कर्मो में प्रवृत्त पुरुष के अनर्थ परम्परारूप जन्म वृक्षो का छेदक तथा
निरतिशय आनन्द के आविर्भाव के साधनभूत साधन चतुष्टय से लेकर साक्षात्कारपर्यन्त कर्मो का
उपदेश करता है