Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 24, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 24, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
विवेकवारिणा सिद्ध्ये प्रक्षाल्यालोकवान्भव ।
भवभूमिषु भीमासु विवेकविकलो वसन् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
इस तरह विवेक को निरतिशय उत्तम फल देनेवाला बतलाकर अत्यन्त अनर्थ परिणामवाले विवेक-
प्रमाद से श्रीरामचन्द्रजी को निवृत्त करते है।
नीचे गिरानेवाले राग आदि अनर्थो से परिपूर्ण, भीषण भवभूमियों मे विवेकहीन होकर निवास
करते हुए आप साधारण प्राणी की भाँति विवश होकर नीचे न गिरिये