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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 24, Verse 17

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 24, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

मा पतोत्पातपूर्णासु विवशः प्राकृतो यथा । संसारमायामुदितामनर्थशतसंकुलाम् ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

सैकड़ों अनर्थो से व्याप्त, महामोहरूपी कुहरे से पूर्ण, उदित हुई इस संसार माया की महारोग की भाँति आप उपेक्षा न कीजिये अर्थात्‌ उससे सावधान हो जाइये