Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 24, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 24, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
अयमहमिति निश्चयो वृथा यस्तमलमपास्य महामते स्वबुद्ध्या ।
यदितरदवलम्ब्य तत्पदं त्वं व्रज पिब भुङ्क्ष्व न बध्यसे मनस्कः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महामते, यह दुश्यभूत
देह आदि मैं हूँ, इस मिथ्या अभिमान को स्वतत्त्वनिश्चय के द्वारा अच्छी तरह दूर ओर जो दुश्यभूत वस्तु
से अतिरिक्त प्रत्यक् एकरस आत्म वस्तु है, उसी का अवलम्बन कर तत्स्वभाव होने के कारण मनोरहित
होकर गमन कीजिए, पान कीजिए, भोजन कीजिए, यों आप बद्ध नहीं होगे । गमनादि व्यवहार करते हुए
भी मुक्त ही है, यह भाव है