Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 24, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 24, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
विवेकतन्तुजालेन गृहीता येन ते शठाः ।
तस्याङ्गानि न लुम्पन्ति पाशा नागबलं यथा ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे पाश
(फन्दा) गजघटा का विनाश नहीं कर सकता वैसे ही जिस पुरुष ने विवेकरूपी सूत के जालसे उन
चालबाज इन्द्रियरूपी शत्रुओं पर विजय पा ली है, उसके शान्ति आदिरूपी अंगों का वे विनाश नहीं
करते