Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 25, Verses 19–21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 25, verses 19–21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 25 · श्लोक 19-21

संस्कृत श्लोक

सर्वसंपत्तिसुभगः सर्वैश्वर्यनमस्कृतः । समस्तदैत्यसामन्तवन्दितोग्रानुशासनः ॥ १९ ॥ महाभुजवनच्छायाविश्रान्तासुरमण्डलः । सर्वबुद्धिगणाधाररत्नमण्डलमण्डितः ॥ २० ॥ तस्योत्सादितदेवस्य कठिनोड्डामराकृतेः । बभूव विपुलं सैन्यमासुरं सुरनाशनम् ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

वह सकल सम्पत्तियों से महासौभाग्यशाली था और ऐश्वर्य उसे प्रणाम करते थे उसके उग्र शासन को सब दैत्य सामन्त नतमस्तक होकर ग्रहण करते थे । उसकी महाभुजाओं के वन की छाया में सब असुर आराम से रहते थे। वह सब बुद्धियों का आधार था और समस्त रत्नों के मण्डल से विभूषित था। दुःसह और भीषण आकृतिवाले उस दैत्य की, जिसने देवताओं को नष्ट-भ्रष्ट कर डाला था, देवताओं का विनाश करनेवाली विशाल वाहिनी थी