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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 25, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 25, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 25 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

तस्मिन्मायाबले सुप्ते देशान्तरगते तथा । तत्सैन्यं तरसा जघ्नुश्छिद्रं प्राप्य किलामराः ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

मायाबलवाले उस दैत्य के सो जाने पर और देशान्तर चले जाने पर अवसर पाकर देवताओं ने उसकी सेना को बड़े वेग से मार डाला