Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 25, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 25, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 25 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
तस्मात्तन्माययाभीताः सुरास्तेऽन्तर्धिमाययुः ।
मेरुकाननकुञ्जेषु मृगा गौरीहरेरिव ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
शम्बरासुर की माया से भयभीत हुए देवता देवीजी के वाहन सिंह से भयभीत हुए मृगों की
नाई स्वर्ग से भागकर सुमेरु पर्वत की झाड़ियों में छिप गये