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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 25, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 25, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 25 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

देवास्तानपु तस्याशु जघ्नुस्तेन स कोपवान् । जगामामरनाशाय परिपूर्णे त्रिविष्टपम् ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

देवताओं ने उन्हें भी जल्दी ही मार डाला, इससे उसके कोप की सीमा न रही । वह देवताओं से भरे हुए स्वर्ग में देवताओं के नाश के लिए गया