Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 25, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 25, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 25 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
सेनापतीन्पुनश्चान्यांश्चकारासुरसत्तमः ।
चपलानुद्भटारावांस्तरङ्गानिव सागरः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
असुर
श्रेष्ठ शम्बर ने जैसे सागर चंचल और उग्र शब्द करनेवाली तरंगों की सृष्टि करता है, वैसे ही चंचल और
उग्र शब्द करनेवाले अन्य सेनापतियों को पुनः उत्पन्न किया