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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 25, Verses 36–37

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 25, verses 36–37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 25 · श्लोक 36

संस्कृत श्लोक

दामो व्यालः कटश्चेति नामभिः परिलाञ्छिताः । यथाप्राप्तैककर्तारश्चेतनामात्रधर्मिणः ॥ ३६ ॥ अभावात्कर्मणां ते च प्राक्तना नच वासनाः । निर्विकल्पकचिन्मात्रपरिस्पन्दैकधर्मकाः ॥ ३७ ॥

हिन्दी अर्थ

दाम (शत्रुओं का दमन करनेवाला), व्याल (साँप की तरह शत्रुओं को लपेटनेवाला) ओर कट (शत्रुओं के शस्त्रो से अपनी सेना को सुरक्षित रखनेवाला) इन नामों से युक्त वे जो प्राप्त हो जाय, उसे करनेवाले एकमात्र चेतना धर्मवाले थे