Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 25, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 25, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 25 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
ते ह्यन्धपारम्पर्येण काकतालीयवद्भटाः ।
प्रकृतामनुवर्तन्ते क्रियामुज्झितवासनाः ।। ३९
हिन्दी अर्थ
वासनाशून्य वे योद्धा काकतालीय न्याय की तरह अन्धपरम्परा से ही प्रस्तुत क्रिया
का अनुवर्तन करते हैँ । भाव यह है किं जब तक उनकी वासना वृद्धि नहीं हुई, तब तक योगियों की तरह
उनका व्यवहार हुआ