Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 25, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 25, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 25 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
अर्धसुप्ता यथा बालाः स्वाङ्गै रिङ्गन्ति केवलम् ।
वासनात्माभिमानाभ्यां हीनास्ते तद्वदेव हि ।। ४०
हिन्दी अर्थ
यदि किये, जिनकी वासना उद्भूत नहीं हुई, उनका व्यवहार कहाँ देखा गया है, तो सुनिये, एसा
कहते हैं।
जैसे आधे सोये हुए बालक अपने अंगों से ही चेष्टा करते है, वैसे ही वासना और आत्माभिमान से
रहित उन लोगों की केवल अंगों से चेष्टा हुई