Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 25, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 25, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 25 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
अतिबलासुरदोर्द्रुमपालिता
मम चमूः स्थिरतामलमेष्यति ।
अमरवारणदन्तविघट्टने-
ष्वमरपर्वतहेमशिला यथा ।। ४४
हिन्दी अर्थ
अत्यन्त बलशाली
असुरों के बाहुरूपी वृक्षों से सुरक्षित मेरी यह सेना शत्रु का प्रहार होने पर भी दिग्गजों के दाँतों का प्रहार
होने पर भी जैसे मेरु पर्वत की सुवर्ण शिला स्थिर ही रहती है विचलित नहीं होती, वैसे ही अत्यन्त
स्थिरता को प्राप्त होगी