Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 26, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
इति निर्णीय दैत्येन्द्रो दामव्यालकटान्विताम् ।
सेनां संप्रेषयामास भूतलं देवनाशिनीम् ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे रामचन्द्रजी, दैत्यराज शम्बरासुर ने इस प्रकार विचारकर दाम, व्याल
और कट से अधिष्ठित देव विनाशिनी अपनी सेना को भूलोक में भेजा
सर्ग सन्दर्भ
पचीसवाँ सर्ग समाप्त छब्बीसवाँ सर्ग देवताओं के साथ पाताल से निकले हुए दाम, व्याल और कट आदि के घोर संग्राम का वर्णन ।