Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 26, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
दैत्याः सागरकुञ्जेभ्यः कन्दरेभ्यश्च सायुधाः ।
उदगुर्भीमनिर्ह्लादाः सपक्षगिरिलीलया ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
भीषण सिंहनादवाले
आयुधधारी दैत्यसागर से, सागर तट की झाड़ियों से, पर्वतो की कन्दराओं से आशय यह है कि जहाँ
जिसे मार्ग मिला, पक्षधारी पर्वतो के आटोप से ऊपर आये