Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 26, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
रोदसीकोटरं हस्तप्रहारहतभास्करम् ।
दानवाः पूरयामासुर्दामव्यालकटैधिताः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
दाम, व्याल और कट से बलशाली हुए
दानवों ने अन्तरिक्ष ओर पृथिवी के मध्यवर्ती आकाश को ठसाठस भर दिया, जिसमें उनके मुक्कों के
प्रहारों से सूर्य निस्तेज हो गया था